20 वीं शताब्दी की उत्तरप्रदेशीय विद्वत् परम्परा
 
शिव प्रसाद त्रिपाठी
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जन्म 25 जुलाई 1936
जन्म स्थान सण्डीला
स्थायी पता
राजाजीपुरम् के सपना कालोनी, सेक्टर-6 सी. 3504

शिव प्रसाद त्रिपाठी

देववाणी संस्कृत के समुपासक, काव्य सुमनों से विभासक आचार्य शिव प्रसाद त्रिपाठी आज भी संस्कृत की सेवा में अहर्निश तत्पर हैं। जनपद हरदोई के प्रख्यात सण्डीला नामक कस्बे में आप का जन्म सन् 25 जुलाई, 1936 ई. में हुआ। आपके पिता का नाम पं. शिव गोविन्द त्रिपाठी एवं माता का नाम हरि प्यारी देवी है।

आप का विवाह 12 जून, 1962 ई. को सम्पन्न हुआ। प्रारंभिक शिक्षा परम्परागत रूप से श्री रुद्र विद्यालय वाजीगंज मल्लावाँ से आरंभ हुई। साहित्य विषय में आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण करके श्री शिव संकट हरण संस्कृत विद्यालय में अध्यापन की सेवा आरंभ की। तत्पश्चात् 15 अक्टूबर, 1967 ई. में सण्डीला में आकर एक नये संस्कृत विद्यालय की स्थापना किया जो आर्य संस्कृत महाविद्यालय सण्डीला के नाम से जाना जाता है। जहाँ पर 15 अक्टूबर, 1967 से लेकर 1996 ई. तक प्रधानाचार्य के रूप में अपनी सेवा देते रहे। शास्त्रचूड़ामणि उपाधि  के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली द्वारा शिव संकट हरण महाविद्यालय में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में 1998 से 2000 ई. तक उच्चकक्षाओं में अध्यापन किया। आयुर्वेद में रुचि होने के कारण आयुर्वेदाचार्य की डिग्री भी ली तथा अध्यापन के साथ-साथ विभिन्न औषधियों-वनस्पतियों के द्वारा लोगों के स्वास्थ्य का भी उपचार करते रहे। आप नाड़ी विज्ञान में अच्छी जानकारी रखते हैं अवकाश प्राप्ति के बाद अपनी-सेवा से लोगों के स्वास्थ्य के लिए व्यक्तिगत रूप से पूरा समय देते हैं।

पं. शिव प्रसाद त्रिपाठी के द्वारा कई संस्कृत एवं हिन्दी में कृतियों का सृजन किया गया है।

(1) संस्कृतवाङ्मये गवेषणा बलि (2017 ई.)

(2) बालनिकुंजम् (2018 ई.)

(3) स्वामीविवेकानन्दस्य राष्ट्रवाद, (2018 ई.) आयुर्वेदिक गवेषणात्मक लेख विवेचनम् संस्कृतगृहम् (प्रका. वर्ष 2001) बालगान्धिः (प्र. वर्ष 2019) कुसंगस्य फलम् कुसंगस्य फलम् (2010) दुष्कर्मणों दोषी कः (प्र. 1999 ई.), भाविकर्णधाराः।

कथाएँ-भाग्याधीन जगत्सर्वम् (2020 ई.), घटना द्वे (2017 ई.), भाग्यं परं दैवतम् (2018 ई.), अतिथिदेवो भव (2017), साधुभिःलोभरनुचितम् (2017 ई.) विपत्तौ धैर्यम् (2013) कर्मणा स्वमेव भाग्यविधाता (2012), सुचारित्रमेव पूज्यते (2008) व्यसनमायद् गृहम् (2001) सद्गुणवान बालक: (2000 ई.) हिन्दी रचनाएँ - बालकथांजलि (2017) कैसर क्यों और कैसे, चिकित्सा (2018) दोहाशतकम् (2021 ई.), कविता वाटिका (2021 ई.) आदि।

आयुर्वेद में शोध लेख - आयुर्वेदविज्ञानम् (1997 ई.) (2) जीवनविज्ञानम् (1998) औषधि चिकित्सा (2000 ई.) जीवन दर्शनम् (2001 ई.) मधुमेहस्य चिकित्सा नाड़ी विज्ञानम्, वनस्पतीनां महत्त्वम् आदि। ये सभी दिल्ली संस्कृत अकादमी द्वारा पुरस्कृत हैं।

साहित्यिक सेवा-उ.प्र. संस्कृत संस्थान की योजना के अन्तर्गत दस दिवसीय संस्कृत शिक्षण शिविर सण्डीला का संचालन (18 मई से 27 मई 2000 ई.)  राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली द्वारा 21 दिवसीय कर्मकाण्ड प्रशिक्षण शिविर का आयोजन राजाजीपुरम् लखनऊ में सन् 2010 ई.) धन्वन्तरि जयन्ती समारोहों का प्रतिवर्ष आयोजन एवं आयुर्वेद के प्रचार प्रसार में विशेष कार्यक्रमों का संचालन। दिल्ली संस्कृत एकाडमी द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में आयुर्वेद/योग का सत्राध्यक्ष, पुरस्कृत, उपकृत एवं सम्मानित।

सम्मान एवं प्रशस्ति- अखिल भारतीय साहित्य परिषद लखनऊ द्वारा भगवती चरण वर्मा सम्मान (1.30.2020 ई.) अखिल भारतीय साहित्य परिषद् उत्तर प्रदेश द्वारा परिक्रमा सम्मान (29.2.2020 ई.), अखिल भारतीय साहित्य परिषद् उ.प्र. (27.3.2018 ई.) के सम्मान।

 वर्तमान में लखनऊ स्थित राजाजीपुरम् के सपना कालोनी, सेक्टर-6 सी. 3504 में अपना आवास बनाये हुए हैं। 85 वर्ष की आयु में भी बहुत क्रियाशील एवं स्वस्थ हैं। संस्कृत के विद्वान प्रोफेसर डॉ. शिव सागर त्रिपाठी आप के सगे बड़े भाई हैं जो राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष संस्कृत रहे हैं।